कंकालेश्वर मंदिर

कंकालेश्वर जहां पर तारकासुर से पीड़ित यमराज ने भयंकर तपस्या की थी

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यह वही पवित स्थान है ,जहां पर तारकासुर से पीड़ित यमराज ने भयंकर तपस्या की थी ।इस तपस्या से उनका शरीर कंकाल मात्र रह गया था। इसलिए इस स्थान को कंकालेश्वर के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव ने यमराज की तपस्या से प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने को कहा ।मराज ने दो वरदान मांगे- पहला वरदान था कि शिव यहां पर पार्वती के सहित निवास करें और दूसरा वरदान मांगा कि आपके चरणों में मेरी सदा भक्ति बनी रहे। भगवान शिव ने यमराज को वरदान देते हुए कहा, गिरीन्द्र राजकन्यया सदैव यक्षकिन्नरैः। सदा वसामि नित्यदा तपस्थले त्वदीयके । सुगुप्तरूपमास्थाय प्रगटिश्याम्ह कलौ। कंकालेश्वरनामा वै मुक्ति मुक्तिप्रदोऽम्यहम्।।

श्री कमलेश्वर मंदिर

पतितपावनी अलकनंदा के बाम कूल पर स्थित श्रीनगर एक पौराणिक और ऐतिहासिक नगर है

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श्रीनगर में भी दक्षिण दिशा में अष्टावक्र महादेव, पूर्व में घसिया महादेव,उत्तर में किलकिलेश्वर और पश्चिम में भगवान कमलेश्वर ।कमलेश्वर मंदिर मुख्य श्रीनगर से पौन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कत्यूरी शैली में बने इस मंदिर की प्राचीनता असंदिग्ध है ।मुख्य सड़क से 200 मीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर भक्तों की आस्था और भक्ति का केंद्र है।